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सीएम योगी दो दिवसीय वाराणसी दौरे पर, स्वर्वेद मंदिर के शताब्दी वर्ष समारोह में पहुंचे

ByRashtriya Nirmaan

Dec 7, 2024

सीएम स्वर्वेद मंदिर के विहंगम योग के शताब्दी वर्ष समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान जब मुख्यमंत्री ने मंच संभाला तो धर्म और सनातन पर वक्तव्य दिया जो सबके मन को छू गया। इन्होंने मंच से  कहा कि बाबा विश्वनाथ की पावन धरा पर आयोजित इस कार्यक्रम के मौके पर सभी का अभिनंदन करता हूं। एक संत की साधना उनकी यौगिक साधना का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। विहंगम योग से भारत के योग को जन जन तक पहुंचाने के लिए संकल्पित हो रहा है। पीएम ने स्वयं इसकी साधना की थी। एक संत सच्चा योगी देश और समाज की परिस्थितियो से हाथ पर हाथ रखकर चुप नहीं बैठ सकता । अपनी आध्यात्मिक साधना से देश को आजादी दिलाने वाले आंदोलन से सदादेव फल जी महाराज भी जुड़े। बोले पीएम कहते हैं हर काम देश के नाम। हमारा देश सुरक्षित है तो धर्म भी सुरक्षित है हमारा धर्म सुरक्षित है हम सुरक्षित हैं। जो भी कार्य हो मत और मजहब से उपर उठकर।

हर कार्य देश के नाम सद्गुरू सदाफलदेव जी महाराज 1857 की क्रांति के समय कहा। अकेले चुप नहीं बैठ जाना है एक पूरा हुआ तो दूसरे की शुरूआत कर देने चाहिए। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते दस वर्षों में पीएम ने काशी का चमका दिया। दुनिया का सबसे बड़ा स्नान घाट नमो घाट जहां हेलीपैड भी है काशी में है । काशी में देव मंदिर जितने भी हैं काम हुआ है काशी में सड़क रेल वायुसेवा की कनेक्टिविटी हो सब बेहतर बनी है। काशी से हल्दिया के बीच जलमार्ग का उपयोग कर यात्रा को आगे बढ़ा सकते हैं। स्वास्थ्य हो या शिक्षा काशी चमक रही है तो यूपी पीएम मोदी के मार्ग दर्शन मे आगे बढ़ रहा है यहां विकास भी है तो विरासत का सम्मान भी है। योग को देश के अंदर वैश्विक मंच पर ले जाने का श्रेय पीएम को जाता है। इस बार 21 जून को पीएम ने विश्व योग दिवस के रूप में कर दिया। प्रयागराज कुंभ भी है। यह वर्ष हमारे लिए महत्वपूर्ण है । 22 जनवरी 2024 को रामलला अयोध्या में विराजमान हुए।
कौन ऐसा सनातनधर्मी नहीं रहा होगा  विरासत का सम्मान है और लोक कल्याण का बड़ा अभियान भी है । पीएम ने जिस भव्य स्वर्वेद मंदिर का उद्घाटन एक वर्ष पहले किया था शताब्दी समारोह के साथ जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। लाखों की संख्या में लोग आए हैं, सबकुछ अपने आप चल रहा है। विज्ञान की पद्धति पर पंडाल लगाए गए। हमारा आध्यात्म लकीर का फकीर नहीं तकनीक और विज्ञान को अपनाकर काम कर रहे हैं। यही भारतीयता है यही सनातन है। यहा सद्गुरू सदाफलदेव जी महाराज की स्मृतियों को नमन करता हूं। ट्रस्त से जुड़े सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद देता हूं। यह दृश्य पच्चीस हजार यज्ञ का विहंगम दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।

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